10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणाम को लेकर शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने प्राचार्यों की बैठक लेकर खराब प्रदर्शन की समीक्षा की और संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों से स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण में कई कारण सामने आए, जिनमें अधिकांश प्राचार्यों ने बताया कि उनकी नई पोस्टिंग होने और परीक्षा का समय नजदीक होने के कारण पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि व्याख्याताओं के प्राचार्य पद पर प्रमोशन, शैक्षणिक सत्र के बीच प्रशिक्षण, शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी जैसे एसआईआर कार्य तथा पूरे सत्र के दौरान युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया ने भी पढ़ाई को प्रभावित किया। बताया गया कि जिले में 194 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति दी गई थी, जबकि करीब 56 व्याख्याता युक्तियुक्तकरण की चपेट में आने से स्कूलों से हट गए, जिससे लगभग 250 व्याख्याताओं की कमी का असर शिक्षण व्यवस्था पर पड़ा। लगातार शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के कारण पूरे सत्र में पढ़ाई बाधित रही, जिसका असर परीक्षा परिणामों पर देखने को मिला।
