रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले से रोजगार की तलाश में तमिलनाडु गए 48 मजदूरों को तिरुवल्लूर जिले के देवंदवक्कम गांव स्थित गौशाला में करीब दो हजार गायें को रखने के लिए उन्हें बंधक बनाकर रखा गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस ने गौशाला के मालिक नटराजन (60) और उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि जांच में शारीरिक प्रताडऩा के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन श्रमिकों के साथ अमानवीय और शोषणकारी परिस्थितियों में काम कराए जाने की पुष्टि हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गौशाला में करीब दो हजार गायें रखी गई हैं। मजदूरों को उनकी देखभाल और अन्य कार्यों में लगाया गया था। जांच में सामने आया कि श्रमिकों से प्रतिदिन 14 घंटे से अधिक काम लिया जा रहा था, जबकि उन्हें तय मजदूरी नहीं दी जा रही थी। इतना ही नहीं, उन्हें परिसर छोडऩे की अनुमति भी नहीं थी। अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों को काम दिलाने की व्यवस्था अरविंद नामक एक श्रमिक ठेकेदार ने की थी। गौशाला संचालक नटराजन और उनकी पत्नी पर आरोप है कि उन्होंने मजदूरों को रोजगार का लालच देकर बुलाया। कथित तौर पर प्रत्येक दंपति को 700 रुपये प्रतिदिन देने का वादा किया गया था तथा परिवहन खर्च के लिए 75 हजार रुपये अग्रिम दिए गए थे। मजदूरों का पहला दल 5 मई को तमिलनाडु पहुंचा था, जबकि कुछ दिन बाद दूसरा दल अपने बच्चों के साथ वहां पहुंचा। सभी को गौशाला के विभिन्न कार्यों में लगाया गया था।
राजस्व मंडल अधिकारी रविचंद्रन ने बताया कि श्रमिकों को 25 दिनों तक कोई मजदूरी नहीं दी गई और उन्हें लंबे समय तक लगातार काम करने के लिए मजबूर किया गया। बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के तहत गौशाला मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी पीडि़तों के बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्र प्रायोजित योजना के तहत प्रत्येक पीडि़त को तत्काल राहत के रूप में 35 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही उन्हें जल्द से जल्द छत्तीसगढ़ वापस भेजने की व्यवस्था भी की जा रही है।
