मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए लागू पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का सकारात्मक असर सामने आया है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के अनुसार 6 मई 2026 से 30 जून 2026 के बीच महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2025 की समान अवधि में महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी, जो 2026 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई। वहीं महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 14,668 से बढ़कर 21,292 हो गई, जो करीब 45 प्रतिशत की वृद्धि है। राज्य के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक वार्षिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि जांजगीर-चांपा, बलोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर जैसे जिलों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली। पंजीयन शुल्क में छूट के कारण नागरिकों को इस अवधि में लगभग 50.14 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को बढ़ावा देने का उद्देश्य उन्हें आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और निर्णय लेने की अधिक क्षमता प्रदान करना है। वहीं वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी ने इसे सामाजिक और आर्थिक बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति होने से उनका आत्मविश्वास और परिवार में उनकी निर्णयात्मक भूमिका मजबूत होती है।
