छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई कर्मचारी छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज (लीव) रूल्स के तहत चाइल्ड केयर लीव का पात्र है, तो केवल स्टाफ की कमी या प्रशासनिक आवश्यकताओं का हवाला देकर उसे इस सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस विभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने केंद्रीय जेल बिलासपुर में पदस्थ महिला वार्डर मंदा तिवारी की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें चाइल्ड केयर लीव देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद पहले मिली अवकाश अवधि समाप्त होने पर 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव मांगी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने महिला वार्डरों की कमी और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का हवाला देकर आवेदन अस्वीकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों से इनकार करने का आधार प्रशासनिक कठिनाइयां नहीं हो सकतीं और आवश्यक व्यवस्थाएं करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने माना कि जुड़वां बच्चों की कम उम्र और उनकी देखभाल की आवश्यकता को देखते हुए केवल स्टाफ की कमी के आधार पर अवकाश से इनकार करना मनमाना है। मामले की सुनवाई के दौरान जेल अधीक्षक ने बताया कि केंद्रीय जेल बिलासपुर में स्वीकृत 106 वार्डर पदों में 24 रिक्त हैं तथा केवल 13 महिला वार्डर कार्यरत हैं, लेकिन हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियां कर्मचारी के कानूनी अधिकार को सीमित नहीं कर सकतीं।
