बस्तर, जो कभी नक्सलवाद की पहचान के रूप में जाना जाता था, अब तेजी से बदलती तस्वीर पेश कर रहा है। जहां पहले सुरक्षा कैंप केवल नक्सल विरोधी अभियानों का केंद्र होते थे, वहीं अब उन्हें विकास और जनसेवा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की नई रणनीति के तहत फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों के बीच सेतु का काम करेंगे। इस पहल की शुरुआत Amit Shah द्वारा नेतनार स्थित Central Reserve Police Force कैंप से किए जाने की संभावना है। योजना के अनुसार, सुरक्षा कैंपों की 3 से 4 बैरकों में जनसुविधा और जनसमस्या निवारण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां ग्रामीणों को डिजिटल सेवा केंद्र की सुविधाएं मिलेंगी, युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग चलाई जाएगी और लघु वनोपजों की प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियां संचालित होंगी। यानी अब एक ही कैंप में सुरक्षा और विकास दोनों गतिविधियां साथ-साथ चलेंगी। सुंदरराज पी. ने बताया कि बस्तर में नक्सल गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं, इसलिए सुरक्षा कैंपों के कुछ हिस्सों को जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए उपयोग करने की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है और अंतिम रूप मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
