*विदेशी मुद्रा बचाने के दावों के पीछे ‘अपनों’ के बिजनेस को चमकाने का खेल, एक लीटर इथेनॉल बनाने में स्वाहा हो रहा है 3000 लीटर पानी।*
*ब्राजील से तुलना आत्मघाती
तुरंत बंद हो इथेनॉल युक्त पेट्रोल की अनिवार्य बिक्री: कन्हैया
*रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) नीति पर तीखा हमला बोलते हुए इसे आम जनता की जेब पर डाका और देश के पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से मांग की है कि देश की जनता, उनकी गाड़ियों और देश के पानी को बचाने के लिए इथेनॉल युक्त पेट्रोल की अनिवार्य बिक्री को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।
गाड़ियों के इंजन हो रहे तबाह, बीमा कंपनियों ने खड़े किए हाथ
कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि आज देश के हर पेट्रोल पंप पर जबरन 20% इथेनॉल (E20) मिला हुआ पेट्रोल बेचा जा रहा है, जिसे सरकार जल्द ही 85% और 100% करने की जिद पर अड़ी है। इस नीति का सबसे घातक असर आम आदमी की गाड़ियों पर पड़ रहा है। देश की बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों में शुमार ICICI लोम्बार्ड का स्पष्ट कहना है कि पुरानी गाड़ियों में E20 फ्यूल का इस्तेमाल ‘लापरवाही’ माना जा सकता है।
“इसका सीधा मतलब यह है कि अगर इथेनॉल वाले पेट्रोल से आपकी गाड़ी का इंजन खराब होता है, तो बीमा कंपनियां क्लेम देने से साफ मना कर रही हैं। सरकार की नीति के कारण जनता की गाड़ियां बेहद तेजी से ‘कबाड़ में तब्दील हो रही हैं और उनके मेंटेनेंस का पूरा खर्च आम आदमी की जेब पर आ रहा है।”
फाइलों की रफ्तार’ के पीछे छिपा भ्रष्टाचार का खेल*
कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि 20% इथेनॉल का जो टारगेट 2030 तक पूरा होना था। उसे सरकार ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए 5 साल पहले ही पूरा कर लिया। लेकिन इसके उलट, 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य 5 साल आगे बढ़ाकर 2029 कर दिया गया और ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ का तो अब नाम लेने वाला भी कोई नहीं बचा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल के टारगेट इतनी तेजी से इसलिए पूरे हो रहे हैं क्योंकि इसके पीछे नीतिगत भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का बड़ा खेल चल रहा है। इथेनॉल उत्पादन के पीछे भी चुनिंदा उद्योगपतियों और रसूखदारों के व्यापारिक हितों को साधा जा रहा है।
. पेयजल की कीमत पर इथेनॉल: देश को सूखे की तरफ धकेलने की साजिश*
कन्हैया अग्रवाल ने भूजल स्तर की भयावह स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत जैसे कृषि-प्रधान और घनी आबादी वाले देश में अंधाधुंध इथेनॉल को बढ़ावा देना पेयजल की कीमत पर हो रहा है। पूरे चक्र को देखें, तो *1 लीटर इथेनॉल बनाने में 1500 से 3000 लीटर पानी* बर्बाद हो जाता है।
> “आज हमारे गांवों में ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी की धार आधी रह गई है। कई इलाकों में भारी जल संकट है। ऐसे में विदेशी मुद्रा बचाने के खोखले दावों के लिए हम हजारों लीटर पानी फूंककर इथेनॉल बना रहे हैं। वह दिन दूर नहीं जब कुछ सालों में हम पीने के पानी के लिए भी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के रहमोकरम पर होंगे। जैसे आज पेट्रोल खरीद रहे हैं, वैसे ही कल पानी खरीदेंगे, और मुमकिन है कि उस पानी का बिजनेस भी जल मंत्री अपने किसी चहेते या बेटे को सौंप दें।”
ब्राजील से तुलना पूरी तरह गलत और आत्मघाती
सरकार द्वारा ब्राजील का उदाहरण दिए जाने पर तंज कसते हुए कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि ब्राजील और भारत में जमीन-आसमान का अंतर है।
*क्षेत्रफल कम (ब्राजील से 2.5 गुना छोटा) | अधिक (भारत से 2.5 गुना बड़ा) |
*आबादी (जनसंख्या)* | अधिक (ब्राजील से 7 गुना ज्यादा) | कम |
*मीठे पानी की उपलब्धता* | सीमित और घटती हुई | भारत से *4 गुना ज्यादा* |
ब्राजील के पास मीठा पानी प्रचुर मात्रा में है और बारिश भी ज्यादा होती है, इसलिए वह पानी को पानी की तरह बहा सकता है। भारत की तुलना ब्राजील से करना भारतीय नागरिकों को प्यासा मारने जैसी नीति है।
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री कन्हैया अग्रवाल में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से इथेनॉल युक्त पेट्रोल की बिक्री तुरंत बंद करने की मांग करते हुए कहा कि जनता को शुद्ध, मानक पेट्रोल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जब तक 100 प्रतिशत इथेनॉल-अनुकूल (Flex-Fuel) गाड़ियां और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार न हो, तब तक आम उपभोक्ताओं पर इसे जबरन न थोपा जाए। बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि इथेनॉल जनित इंजन खराबी पर उपभोक्ताओं को पूरा *बीमा कवर )* मिले।
. इथेनॉल उत्पादन में बर्बाद हो रहे अरबों लीटर पानी और इसके पीछे चल रहे व्यावसायिक गठजोड़ की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ।
कन्हैया अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी और पर्यावरण विरोधी नीति को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी जनता के वाहनों की सुरक्षा और देश के पानी को बचाने के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी ।
