भिलाई। सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) एवं अडाणी टोटल गैस लिमिटेड (एटीजीएल) के मध्य भिलाई इस्पात संयंत्र तथा टाउनशिप में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति के लिए 16 जुलाई को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा संयंत्र की ऊर्जा दक्षता में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जैन एवं बीएसपी के निदेशक प्रभारी श्री चित्तरंजन महापात्र मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे
इस अवसर पर अडाणी टोटल गैस लिमिटेड की ओर से श्री नविंदरजीत सिंह बेदी तथा भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (एम एंड यू) श्री बी. के. बेहरा ने समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) श्री ए. के. चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) श्री पी. के. सरकार, कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार सहित संयंत्र के मुख्य महाप्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान भिलाई इस्पात संयंत्र में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के उपयोग का विस्तार करने, वर्तमान में प्रयुक्त प्रोपेन एवं एलपीजी के स्थान पर तकनीकी रूप से व्यवहार्य क्षेत्रों में पीएनजी अपनाने की संभावनाओं तथा दोनों संगठनों के मध्य ऊर्जा क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर उप प्रबंधक (जनसंपर्क) सुश्री शालिनी चौरसिया द्वारा भिलाई इस्पात संयंत्र का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर निदेशक प्रभारी श्री चित्तरंजन महापात्र ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगी तथा स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता एवं सतत विकास के लक्ष्यों को भी नई गति प्रदान करेगी।
यह समझौता भिलाई इस्पात संयंत्र एवं उसकी टाउनशिप में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की उपलब्धता एवं उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, ऊर्जा प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा तथा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित औद्योगिक विकास के राष्ट्रीय उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
