आज के दौर में सूचना ही सबसे बड़ी शक्ति है। जिसके पास सही और समय पर जानकारी होती है, वह बेहतर निर्णय ले सकता है। स्मार्ट मीटर भी बिजली उपभोक्ता को यही क्षमता देता है। यह उसे अपनी बिजली खपत को समझने, उसका विश्लेषण करने और आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित करने का अवसर प्रदान करता है। मुझे अपनी पुरानी मारुति 800 कार याद आती है। उसमें किलोमीटर मीटर के साथ केवल पेट्रोल इंडिकेटर होता था। उससे केवल इतना पता चलता था कि गाड़ी कितनी चली और कितना पेट्रोल बचा है। लेकिन आज की कारों के स्मार्ट डिजिटल डैशबोर्ड हर पल बताते हैं कि गाड़ी कितनी माइलेज दे रही है, किस गति पर ईंधन की खपत बढ़ रही है और कितनी दूरी तक चल सकती है। जानकारी बढ़ी है, इसलिए वाहन पर नियंत्रण भी पहले से बेहतर हुआ है।
ठीक ऐसा ही सफर बिजली मीटर का भी है। उन्नीसवीं सदी में जब पहली बार बिजली लोगों के घरों तक पहुंची, तब कई स्थानों पर उपभोक्ताओं से बल्बों की संख्या के आधार पर शुल्क लिया जाता था। बाद में मेकेनिकल बिजली मीटर विकसित हुए। भारत में लंबे समय तक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मीटरों का व्यापक उपयोग हुआ। इनमें घूमने वाली डिस्क होती थी, जो बिजली की खपत दर्ज करती थी। एक जमाना था जब बिजलीकर्मी डायरी लेकर घर-घर जाते और रीडिंग नोट करते थे। यह व्यवस्था अपने समय के लिए उपयोगी थी, लेकिन मानवीय त्रुटियों की संभावना बनी रहती थी। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक मीटर आए, जिनमें छेड़छाड़ की संभावना काफी कम हुई। फिर मल्टी-फंक्शन डिजिटल मीटर विकसित हुए, जो बिजली खपत के साथ वोल्टेज, अधिकतम मांग (मैक्सिमम डिमांड) जैसी तकनीकी जानकारियां भी दर्ज करने लगे। तुरंत बिल तैयार करने की व्यवस्था भी विकसित हुई। इसके बावजूद एक कमी बनी रही। उपभोक्ता को महीने के अंत में ही पता चलता था कि उसने कितनी बिजली खर्च की। प्रतिदिन अपनी खपत जानने और उसे नियंत्रित करने का अवसर उसके पास नहीं था।
यहीं से स्मार्ट मीटर की आवश्यकता महसूस हुई। वर्ष 2001 में इटली ने बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर का उपयोग शुरू किया। आज दुनिया के अधिकांश विकसित और अनेक विकासशील देशों में स्मार्ट मीटर बिजली व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। पारंपरिक मीटर और स्मार्ट मीटर के बीच सबसे बड़ा अंतर सूचना के प्रवाह का है। स्मार्ट मीटर से डेटा कंपनी के सर्वर तक पहुंच जाता है। जहां यह सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ता भी मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी बिजली खपत का विवरण देख सकता है। अर्थात अब बिजली की जानकारी केवल बिजली कंपनी के पास ही नहीं रहती, बल्कि उपभोक्ता के हाथ में भी आ गई है।
विशेष आलेख – गोविन्द पटेल (उपमहाप्रबंधक जनसंपर्क), छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़, रायपुर)
