भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह, उनके क्रिकेटर बेटे शशांक सिंह और ड्राइवर पर घरेलू कर्मचारी द्वारा लगाए गए मारपीट और गाली-गलौच के आरोपों के मामले में शशांक सिंह ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि कर्मचारी की ओर से लगातार फोन कर 5 से 7 लाख रुपये की मांग की गई और पैसे देने पर केस वापस लेने की बात कही गई। शशांक सिंह ने दावा किया कि संबंधित घरेलू कर्मचारी पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और पुलिस ने उनका पक्ष जाने बिना एफआईआर दर्ज कर ली। उन्होंने कहा कि अब तक पुलिस ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की है। शशांक के मुताबिक, कर्मचारी को केवल 20 से 25 दिनों के लिए काम पर रखा गया था और पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराना उनकी बड़ी चूक रही। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से अपील की कि किसी भी घरेलू कर्मचारी को रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं।
