इंदौर के लसुड़िया थाना क्षेत्र में वारंट तामील करने गई पुलिस टीम अब खुद सवालों के घेरे में है। स्कीम नंबर 114 में आरोपी गौरव जैन को पकड़ने गई पुलिस टीम पर आरोप लगने के बाद पांच पुलिसकर्मियों को बिना किसी जांच के सस्पेंड कर दिया गया, जिससे पूरे पुलिस महकमे में असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। आरोपी के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें चेक बाउंस, जुआ एक्ट और मारपीट शामिल हैं। पुलिस ने कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपी के घर का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया और उसे गिरफ्तार किया। हालांकि, घटना के 15 दिन बाद आरोप लगे कि पुलिसकर्मियों ने घर में बदसलूकी की और सोना लूट लिया। सीसीटीवी फुटेज ने आरोपों की दिशा बदल दी और दिखाया कि पुलिसकर्मी केवल सीमित दायरे में ही रहे, किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की और गिरफ्तार आरोपी की छोटी बच्ची को सुरक्षित रखा। इसके बावजूद पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया, जिससे अन्य थानों के पुलिसकर्मियों में असंतोष बढ़ा और कार्यप्रणाली पर असर पड़ा है। डीसीपी कुमार प्रतीक ने कहा कि जांच जारी है, लेकिन प्रारंभिक साक्ष्य पुलिस के पक्ष में दिख रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई और सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
