ओमान तट के पास भारतीय तेल टैंकरों पर हुए अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय की मौत हो गई। इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारतीय टैंकर पर हमले और भारतीयों की मौत को लेकर अमेरिका से प्रति कड़ा रूख अपनाया है। दूसरी तरफ एक बार फिर रूसी तेल खरीदने को लेकर पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ठेंगा दिखाया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूस से रिकार्ड तेल खरीदा है। भारत ने सिर्फ मई में 6.7 अरब डॉलर का रूसे से तेल आयात किया है। इसी के साथ ही भारत मई 2026 में रूस से फॉसिल फ्यूल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश रहा।
यूरोपीय थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रूसी तेल पर रिपोर्ट के अनुसार भारत ने मई महीने में रूस से 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) मूल्य के हाइड्रोकार्बन का आयात किया। इसमें तेल, कोयला और तेल उत्पाद है। भारत के रूस से कुल आयात में 83 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल का रहा, जिसकी कीमत 4.8 अरब यूरो थी। इसके अलावा तेल उत्पादों का आयात 550 मिलियन यूरो और कोयले का आयात 429 मिलियन यूरो का रहा।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के अनुसार मई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह रूस से आयात में 21 प्रतिशत की वृद्धि रहा। गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में रूसी कच्चे तेल की अनलोडिंग 36 प्रतिशत बढ़ी। जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में रूसी तेल की डिलीवरी 14 प्रतिशत बढ़ी। इससे साफ है कि भारत के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों ने रूसी तेल की खरीद में तेजी दिखाई।
न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने नवंबर 2025 के अंत में रूसी तेल आयात रोक दिया था, लेकिन मार्च 2026 से फिर खरीद शुरू कर दी है। मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 13 प्रतिशत बढ़ी। जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में यह वृद्धि 42 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा चीन ने खरीदा। इसके बाद भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। तुर्किये ने 6 प्रतिशत और यूरोपीय संघ ने 5 प्रतिशत रूसी कच्चे तेल का आयात किया। रूस की शीर्ष पांच आयातक देशों से हुई कुल आय में चीन की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत यानी लगभग 7 अरब यूरो रही।
रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय संघ ने 21 जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद मई 2026 में रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से तैयार 10 तेल उत्पादों की खेप यूरोपीय बंदरगाहों तक पहुंची।
