मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और शिक्षकों के खाली पदों को लेकर हाईकोर्ट द्वारा केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज हाईकोर्ट के कटघरे में खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और शिक्षा व्यवस्था की यह स्थिति प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। उमंग सिंघार ने कहा कि शिक्षा का भविष्य विज्ञापनों से नहीं बल्कि शिक्षकों की भर्ती, बेहतर स्कूलों और जवाबदेह शासन से बनता है, लेकिन सरकार इन मूलभूत जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि प्रदेश में 2.89 लाख स्वीकृत शिक्षकों के पदों में से 1,15,678 पद खाली हैं, 1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, करीब 5,000 स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं और 59,000 स्कूलों में कंप्यूटर जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22 लाख से अधिक छात्र कम हो गए हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
