मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में शिक्षकों के कुल 2.89 लाख स्वीकृत पदों में से 1.15 लाख से अधिक पद खाली हैं, जिससे लगभग 40 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जिससे वहां पढ़ाई पूरी तरह बाधित है। याचिका में यह भी बताया गया है कि करीब 10,000 स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है, 3,400 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है, हजारों स्कूल पेयजल से वंचित हैं, लगभग 5,000 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं और 40,000 स्कूलों में बाउंड्रीवॉल नहीं है। इन गंभीर हालातों को शिक्षा के अधिकार (RTE) का उल्लंघन बताते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है।
